KYA HO TUM?.........
EK YAAD HO, YA PURA FASSANA HO TUM!
HO MOOHABBAT MERI, YA KOI EHASSA HO TUM!
FOOLO KI TARHA KHILTE HO, YA KALIYO ME BAND RAHTE HO TUM!
FIZAOME ME MAHAKTE HO,YA BUNDO ME BARASTE HO TUM!
NAZRO ME BAND RAHTE HO, YA NIGAHO SE CHALATE HO TUM!
DIL ME TUMHARA AKS HE,YA MERI DHADKAN HO TUM!
MERI DUAO ME HO SHAMIL,YA MERA ETBAAR HO TUM!
MERI ZINDAGI KA HISSA HO ,YA MERI ZINDAGI HO TUM!
MERE KHUD SE INKAR ME YA MERA IKRRAR HO TUM!
MERE BEKHOF JAJHBAAT ME YA MERI SAANS ME HO TUM!
AAJ HUMEN TUM KHUD HI YE BATA DO.............
HO TUM MERI KOI SOCHI HUI KATA
YA MERI LIKHI KOI GAZAL HO TUM........
Friday, April 8, 2011
LACHARI
माँ - बाप की लाचरी देख मन मैं मेरे ये बात अई होगी.....
दुनीय मे भाग्वन ने मेरी कोइ जगह बनायी होगी ,
माँ ने अपने अन्दर मेरा ऐहसास् किया होगा...
आपनी परछाई मै मेरी एक झलक पाइ होगी,
मेरे बबुल का दिल रोय होग कभी ये सोच कर......
शायद इसी के लिये मेने सपनो की डोलि सजाइ होगी,
जिस्की एक मुस्कुरहट से होना था घर का आंगन रोशन कभी....
मेरे इन्तज़ार मे उमिद की उस आंगन मै वो किरन आइ होगी,
दुनिया तो होती ही है बेरहम माँ दुसरो के लिये....
मुझे मात मरो ,
तेरी कोख से ये अवज़ मैने माँ लगई होगी........
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